JNU हिंसा – वार्डन के फोन करने पर क्यों नहीं आई पुलिस

जेएनयू में हिंसा हुई लेकिन सबसे ज्यादा तोड़फोड़ साबरमती हॉस्टल में देखने को मिला वार्डन ने ने बताया कि लाठी डंडे लोहे की रॉड के साथ कुछ नकाबपोश बदमाश यूनिवर्सिटी में आते दिखे हमने तुरंत माहौल को खराब होता देख पुलिस को सूचना दी लेकिन हमें पुलिस की कोई मदद नहीं मिली और 4 घंटे तक पुलिस जेएनयू यूनिवर्सिटी में नहीं पहुंची हमलावर हमला करते रहे लेकिन पुलिस नहीं पहुंची

इस हमले के बाद प्रकाश चंद्र साहू रामावतार मीणा ने इस्तीफा दे दिया और भविष्य में नौकरी नहीं करने का फैसला लिया

लेकिन यह इस्तीफा उनका अभी स्वीकार नहीं किया गया है

पहले तो नकाबपोश बदमाश की पहचान की गई थी लेकिन पहचान के बाद मैं वह एबीवीपी के छात्र निकले जिन्होंने इस हमले को अंजाम दिया लेकिन पुलिस अभी भी उन्हें तलाश रही है और तलाश जारी है यह कब पकड़े जाएंगे इसका हम अंदाजा नहीं लगा सकते यह दिल्ली पुलिस ही बता सकती है

अचानक हॉस्टल में लाठी-डंडों रोड सहित कुछ नकाबपोश बदमाश यूनिवर्सिटी में आते दिखाई देते हैं और हमले को अंजाम देते हैं इसी बीच बॉर्डर पुलिस को सूचित करते हैं लेकिन पुलिस कोई कार्यवाही नहीं करती है और ना ही उस जगह पर पहुंचती है हमलावर हमले को अंजाम देते हैं और बुरी तरीके से छात्र छात्राओं को बेरहमी से पीटते हैं और पुलिस नहीं पहुंचती हो सकता है उन्हें ऊपर से आर्डर ना मिला हो

जब 3 घंटे बाद भीड़ लौटी तो वीडियो में ऐसे दिखाई देते हैं जैसे नकाबपोश बदमाश किसी सिनेमा में सिनेमा देख कर लौट रहे हैं और पुलिस उन्हें निकालने में सहयोग कर रही है वह वीडियो काफी बारे में हुआ था लेकिन फिर भी कोई कार्रवाई नहीं है

नकाबपोश बदमाश एबीवीपी के छात्र ही थे और कोई नहीं उनके हाथों में एसिड की बोतलें भी देखी गई लेकिन एसिड हमले की कोई खबर नहीं है अभी तक

कितना दुख लगता है यह सुनकर कि कुछ बड़े मीडिया चैनल इस हमले को लेफ्ट बनाम राइट बता रहे हैं उन्हें शर्म आनी चाहिए

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